उज्जैन। इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ग्रीन फील्ड राजमार्ग के विरोध में बुधवार को उज्जैन जिले के सात गांवों के किसान खुलकर मैदान में आ गए। किसानों ने काले झंडे हाथों में लेकर और बाइकों पर बांधकर विरोध रैली निकाली और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के कार्यालय का घेराव किया।करीब दो सौ किसान कोठी क्षेत्र से रैली के रूप में नारेबाजी करते हुए एमपीआरडीसी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “एमपीआरडीसी वापस जाओ” के नारे लगाए और परियोजना के खिलाफ आक्रोश जताया।उज्जैन संघर्ष समिति के राजेश सोलंकी ने बताया कि इस ग्रीन फील्ड परियोजना से 280 किसानों की लगभग 450 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। किसानों का आरोप है कि शासन द्वारा दिया जा रहा मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य से काफी कम है और इसे सरकारी गाइडलाइन के बजाय खुले बाजार की दरों पर तय किया जाना चाहिए।किसानों ने केवल मुआवजे का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि सड़क की डिजाइन और ऊंचाई को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि प्रस्तावित ग्रीन फील्ड सड़क को अत्यधिक ऊंचा बनाया जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित होगा। किसानों की मांग है कि सड़क की ऊंचाई कम की जाए और इसे सामान्य राजमार्ग के रूप में विकसित किया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों को भी इसका सीधा लाभ मिल सके।प्रदर्शन में शामिल माखन लाल, अर्जुन चौधरी, नारायण सिंह सहित अन्य किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मुआवजे और सड़क की संरचना से जुड़ी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो किसान निर्माण कार्य रुकवाने से पीछे नहीं हटेंगे।गौरतलब है कि यह 48 किलोमीटर लंबा ग्रीन फील्ड राजमार्ग सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इसके बन जाने से इंदौर से उज्जैन की यात्रा में करीब 45 मिनट का समय बचेगा। हालांकि, फिलहाल किसानों के विरोध ने इस परियोजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।अब देखना होगा कि प्रशासन और एमपीआरडीसी किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं या आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होता है।