दमोह | मध्यप्रदेश

दमोह जिले के नोहटा स्थित ऐतिहासिक नोहलेश्वर मंदिर परिसर में 5 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित होने वाले दस दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। यह भव्य आयोजन संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन में तथा मेले के संयोजक सत्येंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में संपन्न होगा।राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि नोहलेश्वर महोत्सव बुंदेलखंड की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा। यह आयोजन क्षेत्र की समृद्ध विरासत, लोकसंस्कृति और पर्यटन संभावनाओं को उजागर करेगा।

नोहलेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

नोहटा में स्थित नोहलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। यह मंदिर कलचुरी कालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मान्यता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण 10वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। मंदिर की भव्य शिल्पकला, अलंकृत स्तंभ, विशाल गर्भगृह और बारीक नक्काशी आज भी उस कालखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती है।पुरातत्वविदों के अनुसार नोहलेश्वर मंदिर मध्य भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, जहां प्राचीन काल से श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते आ रहे हैं। यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

महोत्सव की विशेषताएं

दस दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव के दौरान देशभर के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। महोत्सव में धार्मिक और सांस्कृतिक संध्याएं, कार्यशालाएं, महिला सम्मेलन, किसान गोष्ठी तथा पर्यटन गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।इन आयोजनों के माध्यम से बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति, परंपराएं और ऐतिहासिक धरोहर को व्यापक मंच प्रदान किया जाएगा। महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं, ताकि देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।