ट्रैफिक प्रबंधन की लापरवाही उजागर, राहगीरों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी
रीवा। जिले में यातायात व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर की प्रमुख सड़कों पर भीषण जाम के कारण वाहन रेंग-रेंग कर चलते नजर आए, जिससे आमजन, राहगीरों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नया साल शुरू होने के बावजूद ट्रैफिक प्रबंधन की बदहाली साफ दिखाई दे रही है।एक ओर जहां रीवा के पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान नए साल में कानून-व्यवस्था को लेकर जिलेभर में विशेष सुरक्षा योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए देर रात स्वयं सड़कों पर उतरते नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ थाना क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालात ऐसे हैं कि एक थाना प्रभारी अपने थाने से मात्र 50 मीटर की दूरी पर भी ट्रैफिक सुचारू नहीं कर पा रहे हैं।शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल नया बस स्टैंड क्षेत्र में पूर्व से समुचित व्यवस्था न किए जाने का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। नए साल और पर्यटन सीजन के दौरान भीड़ प्रबंधन में भारी कमी के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। सड़क के एक ओर बसें और दूसरी ओर ठेले वालों का कब्जा है। बस संचालकों पर आरोप है कि वे बसों को अंदर की पार्किंग से निकालकर सड़क के बीच खड़ा कर यात्रियों का सामान लोड करते हैं। पीछे फंसे वाहनों, एम्बुलेंस या अस्पताल जाने वाले मरीजों की उन्हें कोई परवाह नहीं रहती। जब तक बस पूरी तरह यात्रियों से नहीं भर जाती, तब तक बस वहीं खड़ी रहती है।इस अव्यवस्था के कारण अन्य वाहनों की रफ्तार थम सी गई और सड़क पर गाड़ियां कीड़े-मकोड़ों की तरह रेंगती नजर आईं। हैरानी की बात यह रही कि इतने भीड़भाड़ वाले इलाके में न तो नगर निगम के कर्मचारी नजर आए और न ही यातायात पुलिस की मौजूदगी दिखी। वीडियो में स्थानीय थाने के दो पुलिसकर्मी दिखाई दिए, लेकिन जाम खुलवाने के बजाय वे दूसरे रास्ते से निकलते हुए नजर आए।इसी तरह का हाल सिरमौर चौराहा क्षेत्र का भी रहा। यातायात चौकी पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला, केवल ताला लटकता हुआ दिखाई दिया। सड़क के एक ओर ऑटो चालकों और दूसरी ओर ठेले वालों ने कब्जा जमा रखा है। उल्लेखनीय है कि सिरमौर चौराहा शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जो नया बस स्टैंड, जिला अस्पताल, पुराना बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बोदाबाग और विश्वविद्यालय मार्ग को जोड़ता है। यहां आए दिन लगने वाले जाम से राहगीर और आम नागरिक बेहद परेशान नजर आए।रीवा की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। शहर में बेलगाम हो चुकी यातायात व्यवस्था के चलते जाम में फंसना आम बात हो गई है। हाल ही में किला रोड पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल करीब 30 मिनट तक जाम में फंसे रहे थे। इससे पहले डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला का काफिला भी स्टेशन रोड पर जाम में फंस चुका है।
अब शहर की जनता जिम्मेदार अधिकारियों से कई सवाल पूछ रही है—
• अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेशों का सख्ती से पालन क्यों नहीं हो पाता?
• दिखावटी कार्रवाई कब तक चलती रहेगी और अतिक्रमणकारियों में कार्रवाई का डर कब पैदा होगा?
• शहरवासियों को भीषण जाम से आखिर कब राहत मिलेगी?
• क्या प्रशासन केवल मीडिया में वाहवाही के लिए सड़कों पर उतरता है?
• भीड़भाड़ वाले इलाकों में नगर निगम, यातायात पुलिस या स्थानीय थाने की पुलिस नियमित रूप से तैनात क्यों नहीं रहती?
शहरवासियों को अब ठोस और स्थायी समाधान की उम्मीद है, ताकि रीवा की सड़कों पर यातायात व्यवस्था पटरी पर लौट सके और आमजन को जाम की इस दुश्वारी से निजात मिल सके।

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