अश्लील प्रस्तुतियों से बाणगंगा मेला के संस्कृत मंच की गरिमा धूमिल, सनातन धर्मालंबियों में आक्रोश
शहडोल।
शहडोल जिले में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हर वर्ष आयोजित होने वाला सात दिवसीय ऐतिहासिक बाणगंगा मेला इस बार विवादों में घिर गया है। मेले के सांस्कृतिक मंच, जिसे स्थानीय लोग “संस्कृत मंच” के नाम से जानते हैं, वहां अश्लील, फूहड़ और प्यार–मोहब्बत से भरी नृत्य प्रस्तुतियों ने मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक छवि को धूमिल कर दिया है। इन प्रस्तुतियों को लेकर सनातन धर्मालंबियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बाणगंगा मेला और इससे जुड़ा ऐतिहासिक विराट मंदिर उनकी आस्था का केंद्र है और यह स्थल सनातन संस्कृति व परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे पवित्र मंच पर “पीले-पीले होठों से शराब बन जाऊंगी” जैसे गीतों पर नृत्य की प्रस्तुतियां न केवल आपत्तिजनक हैं, बल्कि सनातन धर्म की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाली हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले चार वर्षों से लगातार इस संस्कृत मंच पर इस तरह की फूहड़ प्रस्तुतियां कराई जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। सनातनी संगठनों का स्पष्ट कहना है कि इस मंच पर केवल भजन, जागरण, पंडवानी, रामलीला और अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का ही आयोजन होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ा जा सके विवाद यहीं तक सीमित नहीं है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका परिषद शहडोल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक विराट मंदिर के ठीक पास एक कंपोजिट शराब दुकान संचालित हो रही है, जहां खुलेआम शराब का सेवन किया जाता है। इसी मार्ग से महिलाएं, बच्चे और आम श्रद्धालु आवागमन करते हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका परिषद द्वारा न तो कोई बैरिकेड लगाया गया और न ही उस स्थान को कवर किया गया।इसके अलावा मेले में नगर पालिका परिषद द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जो चर्चा का विषय बने हुए हैं। वहीं, पूरे मेले में एक भी ऐसा सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया, जिसमें इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, सुरक्षा के मापदंड, व्यापारियों की रेट लिस्ट या वाहन स्टैंड की शुल्क सूची अंकित हो।सूत्रों के अनुसार, संस्कृत मंच पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए करीब 5 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। आरोप है कि इस टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया गया और जानबूझकर ऐसी टीमों को मंचन का अवसर दिया गया, जिनसे नगर पालिका परिषद को आर्थिक लाभ पहुंच सके। इसी कारण इस ऐतिहासिक मंच की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।स्थानीय सनातनी नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इन घटनाओं का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में भी इस तरह की अश्लील और स्तरहीन प्रस्तुतियां कराई गईं, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। लोगों की मांग है कि नगर पालिका परिषद शहडोल तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे, संस्कृत मंच की गरिमा बहाल करे और केवल सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का ही आयोजन सुनिश्चित करे।

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