मथुरा।
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नए कानून पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद देशभर में इस कानून को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।ब्रजभूमि के साधु-संतों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सकारात्मक स्वागत किया है। साधु-संतों का कहना है कि यह फैसला शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लाखों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान की जीत बताया। साधु-संतों का मानना है कि जब तक सभी वर्गों की सहमति नहीं बनती, तब तक इस तरह के महत्वपूर्ण कानूनों को लागू नहीं किया जाना चाहिए।श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का वे स्वागत करते हैं और यह आदेश सवर्ण समाज में खुशी की लहर लेकर आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी के प्रस्तावित नियम समाज में असंतुलन पैदा कर सकते थे, इसलिए अदालत का हस्तक्षेप जरूरी था।फलाहारी महाराज ने आगे कहा कि न्यायपालिका ने समय रहते आम जनता की आवाज को सुना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई में भी कोर्ट सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेगा और न्यायपूर्ण फैसला देगा। उनके अनुसार, शिक्षा नीति में किसी भी तरह का बदलाव सबको साथ लेकर ही होना चाहिए।गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर देश के कई हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। विभिन्न सामाजिक और छात्र संगठन इसे एकपक्षीय और असमान बताते हुए नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगाए जाने के बाद अब सभी की निगाहें 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।