खाचरोद (उज्जैन)। खाचरोद तहसील क्षेत्र से इंसानियत और प्रशासनिक संवेदनशीलता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। खाचरोद तहसील के बुराना बाद गांव की रहने वाली 60 वर्षीय विधवा महिला कमला बाई पिछले दो वर्षों से अपनी ही जमीन और घर के हक के लिए भटक रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।

कमला बाई के पति रमेश का एक वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनका विवाह हो चुका है और अब कमला बाई घर में अकेली रहती हैं। महिला का आरोप है कि पति की मृत्यु के बाद उनके देवर ने करीब तीन बीघा पैतृक भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया और उन्हें खेत में जाने तक नहीं दिया जा रहा।

न्याय की आस में भटक रही महिला
कमला बाई बीते कई दिनों से लगातार खाचरोद तहसील कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, इस उम्मीद में कि प्रशासन उन्हें न्याय दिलाएगा। लेकिन महिला का आरोप है कि तहसील कार्यालय से उन्हें रोजाना अपमानित कर बाहर निकाल दिया जाता है।

हमारी टीम जब किसी अन्य कारणवश तहसील कार्यालय पहुंची, तो कमला बाई को हाथों में दस्तावेज लिए बाहर बैठे देखा। बातचीत में उन्होंने अपनी पूरी आपबीती साझा की।

महिला ने बताया कि उन्होंने जिला कलेक्टर कार्यालय, उज्जैन एसपी कार्यालय, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर जनसुनवाई में भी कई बार आवेदन दिए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं हुई।

केस जीतने के बाद भी नहीं मिला हक
कमला बाई ने बताया कि उन्होंने तहसील कोर्ट में केस लड़ा और फैसला उनके पक्ष में आया, इसके बावजूद आज तक उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया गया। महिला का कहना है कि गांव का पटवारी उन पर समझौते का दबाव बना रहा है, जबकि जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज उनके नाम पर मौजूद हैं।

घर भी छीना, झोपड़ी में रहने को मजबूर
महिला का आरोप है कि देवर ने उनका पैतृक मकान भी हड़प लिया, जिसके बाद वह गांव के बाहर एक झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। थोड़ी सी जमीन जो उनके पास थी, उस पर भी देवर ने कब्जा कर लिया।

मारपीट और धमकी के आरोप
कमला बाई ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने खेत में गेहूं की फसल बोई, तो देवर ने फसल काट ली। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस घटना की मेडिकल रिपोर्ट उनके पास मौजूद है। उन्होंने खाचरोद थाने में सूचना भी दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। बाद में गांव वालों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

पटवारी पर गंभीर आरोप
पीड़िता ने गांव के पटवारी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पटवारी की हेराफेरी और मिलीभगत से ही देवर ने जमीन पर कब्जा किया। साथ ही उन्हें राजनीतिक दबाव दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी गई।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत, वापस लेने का दबाव
कमला बाई ने बताया कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 108 पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन तहसील कार्यालय से उन्हें धमकाकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

प्रशासन पर उठे सवाल
अब सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी क्या एक गरीब, बेसहारा विधवा महिला को न्याय नहीं मिल पाएगा? दो वर्षों से दर-दर भटक रही कमला बाई आज भी अपने हक की जमीन और घर के लिए प्रशासन से गुहार लगा रही हैं।