उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे अब नॉन-एलिवेटेड
नागदा जंक्शन। उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को एलिवेटेड के बजाय नॉन-एलिवेटेड (ग्राउंड लेवल) बनाए जाने के मुख्यमंत्री के निर्णय का क्षेत्र में स्वागत किया जा रहा है। किसानों के लंबे और व्यापक विरोध के बाद सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला किसान आंदोलन की जीत के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जनभावनाओं के अनुरूप बताया है।पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे को नॉन-एलिवेटेड बनाने से सरकार को लगभग 600 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने मांग की है कि इस बचत राशि का उपयोग जनहित में करते हुए उज्जैन–भेरूगढ़–उन्हेल–नागदा 51 किलोमीटर मार्ग को फोरलेन किया जाए। वर्तमान में यह मार्ग टू-लेन है और भारी यातायात के कारण आए दिन जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है।उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई लगभग 102 किलोमीटर है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण सहित करीब 5500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। प्रारंभिक योजना के तहत इस एक्सप्रेस-वे को एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना था, जिसमें बड़े पैमाने पर पिलर, ब्रिज और अत्याधुनिक संरचनाओं का निर्माण शामिल था। एलिवेटेड मार्ग की लागत प्रति किलोमीटर अत्यधिक होती है, क्योंकि इसमें कंक्रीट स्ट्रक्चर, फाउंडेशन, गर्डर और अतिरिक्त सुरक्षा प्रबंधों की आवश्यकता पड़ती है।वहीं नॉन-एलिवेटेड सड़क निर्माण में भूमि अधिग्रहण के बाद सीधे सतही मार्ग तैयार किया जाता है, जिससे लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एलिवेटेड मार्ग की तुलना में नॉन-एलिवेटेड मार्ग की लागत प्रति किलोमीटर लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम होती है। इसी कारण इस परिवर्तन से सरकार को बड़ी वित्तीय बचत संभव है।पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने कहा कि आगामी सिंहस्थ महाकुंभ, बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और लगातार बढ़ते यातायात को देखते हुए भेरूगढ़–उन्हेल–नागदा मार्ग का फोरलेन होना अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के फोरलेन होने से यातायात व्यवस्था सुदृढ़ होगी, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और क्षेत्र के व्यापार व उद्योग को भी नई गति मिलेगी।कुल मिलाकर, उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को नॉन-एलिवेटेड बनाने का निर्णय जहां किसानों की जीत माना जा रहा है, वहीं अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस बचत राशि का उपयोग स्थानीय आधारभूत संरचना और सड़क विकास में किस प्रकार करती है।

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