बागली।
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को गांधीजी की पुण्यतिथि के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागली में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीएमओ डॉ. अमित नागर ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान की शुरुआत की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीएमओ डॉ. अमित नागर ने बताया कि कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से होने वाला एक दीर्घकालिक लेकिन पूरी तरह उपचार योग्य संक्रामक रोग है। यह रोग मुख्य रूप से त्वचा, परिधीय तंत्रिकाओं, ऊपरी श्वसन पथ और आंखों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और बहु-औषधीय चिकित्सा (MDT) से दिव्यांगता को पूरी तरह रोका जा सकता है और अब यह बीमारी असाध्य नहीं रही है। कुष्ठ रोग का इलाज सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है।इस अवसर पर बीईई राधेश्याम चौहान ने बताया कि कुष्ठ रोग अत्यधिक संक्रामक नहीं होता है। यह रोग लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में रहने से फैलता है, जैसे नाक या मुंह से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से। उन्होंने कुष्ठ रोग के लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि त्वचा पर हल्के या तांबे के रंग के धब्बे जिनमें संवेदना कम हो जाती है, हाथ-पैरों में सुन्नता या कमजोरी और त्वचा पर गांठें या सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं।उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग का सबसे प्रभावी उपचार मल्टी-ड्रग थेरेपी (MDT) है, जो सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।कार्यक्रम में डॉ. पपिता सोलंकी, अनिल जोशी, मेहरू वास्केल, मानसी गुप्ता, सुनील मुजाल्दे सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बागली सुपरवाइजर नंदकिशोर मोहवाल ने किया, जबकि मनोहर यादव ने आभार व्यक्त किया।