छाता (मथुरा)। तहसील छाता के ग्राम सांखी में वर्ष 2009 में आवंटित किए गए कृषि पट्टों को लेकर चल रहे विवाद को लेकर जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए गांव में खुली बैठक आयोजित की। बैठक में एडीएम प्रशासन अमरेश सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की शिकायतों एवं आपत्तियों को सुना। यह बैठक ग्राम के प्राइमरी स्कूल परिसर में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि वर्ष 2009 में तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा कुल 220 कृषि पट्टों का आवंटन किया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उस समय सरकारी पट्टा आवंटन नीति का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और पात्र लोगों के साथ-साथ कुछ अपात्र व्यक्तियों को भी पट्टे दे दिए गए। इसी को लेकर गांव निवासी चरण सिंह द्वारा सरकारी भूमि को मुक्त कराने की मांग करते हुए प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई गई है।वहीं बैठक में मौजूद कई ग्रामीणों ने इन आरोपों को निराधार बताया। ग्रामीण वीरपाल सिंह ने कहा कि वर्ष 2009 में दो चरणों में कुल 220 पट्टों का आवंटन हुआ था। उस समय मनोनीत ग्राम प्रधान की मौजूदगी में पूरे गांव में मुनादी कराई गई थी। इसके बाद तत्कालीन कानूनगो और पटवारी द्वारा नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से पट्टे वितरित किए गए थे। उन्होंने बताया कि पट्टे गरीब और असहाय लोगों को दिए गए थे।ग्रामीण श्याम सिंह ने भी कहा कि पट्टा आवंटन की पूरी प्रक्रिया शासन के नियमों के तहत की गई थी और सभी पात्र लोगों को ही पट्टे मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया किकुछ लोग निजी स्वार्थ और आर्थिक लाभ के उद्देश्य से अब इन पट्टों को अपात्र बताने का प्रयास कर रहे हैं।हालांकि, ग्रामीण नारायण सिंह ने बैठक में आरोप लगाया कि कुछ अपात्र लोगों को भी पट्टे दिए गए थे, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ग्रामीणों ने यह भी जानकारी दी कि बाद में कई पट्टाधारकों ने अपनी जमीन दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद के कॉलोनाइजरों को बेच दी, जिससे विवाद और गहराया है।इस पूरे मामले पर एडीएम प्रशासन अमरेश सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत सांखी में पट्टों से जुड़े विवाद की जांच के लिए खुली बैठक आयोजित की गई है। सभी पक्षों की बात सुनी गई है और दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।