उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है और पिछले 2 वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है।शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 हो गई है, जबकि निजी मेडिकल कॉलेज 12 से 14 हो गए हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से दमोह, बुधनी और छतरपुर में नए मेडिकल कॉलेज प्रारंभ होंगे। शासकीय एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850, और कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी सीटें 1262 से 1468 हुईं और कुल पीजी सीटें 2862 हो गई हैं। साथ ही 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं।प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार भी हुआ है। इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर, सीटी-स्कैन, एमआरआई और कार्डियक कैथ लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं। इंदौर में ब्लड कैंसर उपचार हेतु CAR-T सेल थेरेपी भी प्रारंभ हुई है।मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142, और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हुई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों कार्ड जारी किए गए और हजारों करोड़ रुपये के उपचार अनुमोदित किए गए।उप मुख्यमंत्री ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना में नए मेडिकल कॉलेजों का संचालन, सीटों में वृद्धि, विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती, सिविल अस्पतालों में डायलिसिस, एमआरआई और कैथ लैब सुविधाओं का विस्तार, ट्रॉमा सेंटर और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विकास शामिल बताया।इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, प्रमुख सचिव श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।