विश्व शांति के लिए 1100 किमी की दंडवत यात्रा कर 540 दिन में उज्जैन पहुंचे राहुल मलिक रभड़ा, टूटी पसलियां और कंधे पर नहीं टूटा हौसला
उज्जैन। श्रद्धा, संकल्प और आस्था की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए हरियाणा के सोनीपत निवासी राहुल मलिक रभड़ा ने विश्व शांति के उद्देश्य से 1100 किलोमीटर की कठिन दंडवत यात्रा पूर्ण कर बाबा महाकाल के दरबार में जलाभिषेक किया। 24 अगस्त 2024 को हरिद्वार की हर की पौड़ी से शुरू हुई यह यात्रा 540 दिनों में पूर्ण हुई। मंगलवार को उज्जैन पहुंचकर राहुल ने महाकाल मंदिर के गर्भगृह में गंगाजल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया।चर्चा के दौरान राहुल मलिक रभड़ा ने बताया कि इस लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उनके दोनों कंधे और दोनों पसलियां टूट गईं, लेकिन बाबा महाकाल में अटूट विश्वास ने उन्हें रुकने नहीं दिया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह प्रतिदिन लगभग 2 किलोमीटर दंडवत करते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह दूरी बढ़ाकर 12 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंचा दी। जमीन पर लेटकर दंडवत करते हुए 1100 किलोमीटर का सफर तय करना उनके लिए शारीरिक रूप से अत्यंत पीड़ादायक था, फिर भी उनका संकल्प अडिग रहा।उज्जैन आगमन पर कोयला फाटक और आगर रोड पर उनका ऐतिहासिक स्वागत किया गया। सड़क पर फूलों की चादर बिछाई गई और उज्जैन मिल मजदूर संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह भदोरिया, संतोष सुनहरे, शेषपाल सिंह चाहर सहित सैकड़ों नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। स्वागत के दौरान पूरा शहर “बाबा महाकाल” के जयकारों से गूंज उठा।यात्रा के अंतिम पड़ाव पर जब राहुल की माताजी और परिजनों ने उन्हें घायल अवस्था में देखा तो उनकी आंखें नम हो गईं। भावुक क्षणों के बीच परिवारजनों ने उन्हें गले लगाया। पूरा परिवार बाबा के जयकारे लगाते हुए महाकाल मंदिर पहुंचा और जलाभिषेक में शामिल हुआ।जूना अखाड़ा सोनीपत के गुरु हरिगिरि महाराज के शिष्य राहुल मलिक रभड़ा ने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्हें हर धर्म और समुदाय के लोगों का सहयोग मिला। उन्होंने बताया कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी ने रास्ते में सहयोग कर यह साबित किया कि इंसानियत और भाईचारा ही सबसे बड़ा धर्म है।उज्जैन मिल मजदूर संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह भदोरिया ने कहा कि विश्व शांति के पावन उद्देश्य से की गई यह दंडवत यात्रा पूरे देश के लिए प्रेरणा है। वहीं राहुल की चाची कमला (पानीपत, हरियाणा) ने भावुक होकर कहा कि परिवार को उन पर गर्व है और बाबा महाकाल की कृपा से ही यह यात्रा सफल हो सकी।

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