मथुरा | 

कान्हा की नगरी ब्रज में होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और परंपराओं का महाउत्सव है। बसंत पंचमी के साथ ही ब्रज में 40 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध होली उत्सव की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। इसे और भव्य व दिव्य स्वरूप देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रंगोत्सव 2026 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जिला प्रशासन मिलकर इस रंगोत्सव को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यादगार बनाने में जुटा है।

बसंत पंचमी से होगी होली उत्सव की शुरुआत

ब्रज में बसंत पंचमी के दिन परंपरागत रूप से होली का डांडा गाड़ा जाता है, जिसे होली के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से मंदिरों में ठाकुर जी को गुलाल अर्पित किया जाएगा और समाज गायन के साथ फाल्गुन के गीत गूंजने लगेंगे। इसके बाद अगले 40 दिनों तक श्रद्धालु श्रीकृष्ण की लीलाओं के रंगों में सराबोर रहेंगे।

24 फरवरी को लड्डू होली, 25 को लठमार होली

रंगोत्सव का मुख्य आकर्षण बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली होगी, जो 25 फरवरी 2026 को खेली जाएगी। इससे एक दिन पहले 24 फरवरी को राधारानी मंदिर, बरसाना में लड्डू होली का आयोजन होगा, जहां श्रद्धालुओं पर प्रसाद स्वरूप लड्डुओं की वर्षा की जाएगी।

ब्रज में होंगे भव्य आयोजन

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मथुरा जनपद में 23 भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इनमें बरसाना, नंदगांव, मथुरा, रावल, गोकुल, बलदेव, फालैन और महावन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए 25 मंच और पर्यटकों के आकर्षण हेतु 12 सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जाएंगे।

मंदिरों में होगी विशेष लाइटिंग

रंगोत्सव के दौरान राधारानी मंदिर बरसाना, नंद मंदिर नंदगांव, नंद किला गोकुल, दाऊजी मंदिर बलदेव सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष विद्युत सजावट की जाएगी, जिससे संपूर्ण ब्रज क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठेगा।

800 कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

24 और 25 फरवरी को बरसाना में दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें 70 से अधिक सांस्कृतिक दलों के करीब 800 कलाकार ब्रज की लोक कला, लोक नृत्य और परंपराओं की प्रस्तुति देंगे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे, ताकि रंगोत्सव 2026 श्रद्धा, सुरक्षा और सौहार्द का प्रतीक बन सके।