खरगोन। शहर के बिस्टान नाका पर स्थापित की गई महान क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। प्रतिमा की गुणवत्ता और लागत को लेकर अब नगर पालिका परिषद अपने ही पार्षदों के घेरे में आ गई है। गुरुवार को नगर पालिका के कई पार्षद खुलकर सामने आए और प्रतिमा खरीदी में गंभीर अनियमितता के आरोप लगाते हुए सप्लायर ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।वार्ड क्रमांक 31 के पार्षद एवं मूर्ति स्थापना आयोजन समिति के अगुवा भागीरथ बड़ोले के नेतृत्व में पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्षद चंदू तोमर, लक्की चोपड़ा सहित अन्य पार्षद भी शामिल रहे। सभी ने नगर पालिका परिसर स्थित गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर इस पूरे प्रकरण में शामिल लोगों को सद्बुद्धि देने की कामना की। इसके बाद सभी पार्षद कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।पार्षदों ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया कि नगर पालिका परिषद की पीआईसी (PIC) से कांति सूर्या टंट्या मामा की प्रतिमा को 10 लाख रुपये की स्वीकृत राशि के साथ कांस्य या पत्थर की प्रतिमा के रूप में स्थापित किया जाना था। लेकिन ठेकेदार द्वारा इसके स्थान पर एफआरपी (फाइबर) मटेरियल की प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जिसकी अनुमानित कीमत मात्र 75 हजार से 1 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है।पार्षदों का कहना है कि इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सभी पार्षदों को ट्रोल किया जा रहा है, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने स्वयं को इस पूरे मामले से अलग बताते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।पार्षदों ने कहा कि यह मामला न सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार का है, बल्कि आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करने और महान क्रांतिकारी टंट्या मामा के अपमान के समान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।गौरतलब है कि इससे पहले भी कांग्रेस पार्टी द्वारा इस मुद्दे को लेकर धरना प्रदर्शन किया जा चुका है, जिसमें शहीद के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था।