काशी | माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान काशीनाथ का भव्य उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दिव्य आयोजन में 1008 साधु-संतों द्वारा विधिवत आह्वान किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे और काशी की आध्यात्मिक छटा देखते ही बन रही थी।

उत्सव के अंतर्गत विशेष महायज्ञ का आयोजन किया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित की गईं। यज्ञ के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें साधु-संतों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में क्षेत्रवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और सेवा कार्यों में सहयोग किया।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं का बेहतर समन्वय

भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्वयंसेवकों द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संभाला गया। दर्शन, भंडारे और यज्ञ स्थल पर अनुशासन बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

परंपरा और मान्यता

मान्यता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर एक प्राचीन और दिव्य स्थल है, जहां प्रत्येक वर्ष पूर्णिमा के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। माघ पूर्णिमा पर भगवान कृष्ण के उत्सव का भी विशेष महत्व बताया जाता है। परंपरानुसार इस दिन महायज्ञ और भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें देश-प्रदेश से साधु-संत पधारते हैं।

प्रमुख संतों की रही उपस्थिति

इस वर्ष के आयोजन में राधे बाबा के महंत कन्हैया दास बाबा सहित अनेक प्रतिष्ठित साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके सान्निध्य से पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त हुई। महंत कन्हैया दास बाबा ने अपने उद्बोधन में काशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सद्भाव, सेवा और सनातन परंपराओं का संरक्षण होता है।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

श्रद्धालुओं का कहना है कि माघ पूर्णिमा पर काशी विश्वनाथ में दर्शन-पूजन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। उत्सव के समापन पर मंदिर प्रशासन ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी साधु-संतों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।