बैतूल जिले के खेड़ी रामोसी गांव में हुए पथराव मामले ने नया मोड़ ले लिया है। घटना में भाजयुमो जिलाध्यक्ष भास्कर मगरदे और पुलिस टीम पर पथराव के आरोप के बाद अब गांव के आदिवासी परिवार बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। आदिवासी परिवारों का आरोप है कि 24 मार्च को हुई घटना के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, महिलाओं के साथ बदसलूकी हुई और कुछ लोगों द्वारा जान से मारने की कोशिश भी की गई। परिवारों ने यह भी दावा किया कि वे वर्ष 1918-19 से इस भूमि पर काबिज हैं और उनके पास संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।

परिवारों ने आरोप लगाया कि भास्कर मगरदे द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनकी जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है, साथ ही राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। पीड़ितों ने एसपी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और एकतरफा कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं पुलिस द्वारा 34 आदिवासियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच जारी होने की बात कही है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।