देशव्यापी हड़ताल के तहत श्रमिक संगठनों ने सौंपा ज्ञापन, श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग
नागदा जंक्शन (निप्र)। ग्रेसीम क्रांतिकारी कर्मचारी यूनियन, नगरीय निकाय कर्मचारी महासंघ और सीटू के संयुक्त बैनर तले 12 फरवरी को आयोजित देशव्यापी हड़ताल के तहत गुरुवार को केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ तहसीलदार मधु नायक को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन माननीय राष्ट्रपति महोदया, नई दिल्ली के नाम प्रेषित किया गया।यूनियनों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए बिना और व्यापक चर्चा किए बिना चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया। उनका कहना है कि इन संहिताओं का उद्देश्य ट्रेड यूनियनों को कमजोर करना और श्रमिक आंदोलनों को बेअसर करना है, जिससे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचे।संगठनों का आरोप है कि ये श्रम संहिताएं अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर लाई गईं और संसद में विपक्ष की अनुपस्थिति में पारित की गईं। उनका कहना है कि इन संहिताओं के लागू होने से लगभग 70 प्रतिशत कारखाने श्रम कानूनों की परिधि से बाहर हो जाएंगे और श्रमिक नियोक्ताओं के रहमोकरम पर निर्भर हो जाएंगे।
प्रमुख मांगें
ज्ञापन में श्रमिक संगठनों ने चारों श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द करने, ठेकाकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने, फिक्स टर्म एम्प्लॉयमेंट समाप्त करने और श्रम शक्ति नीति 2025 वापस लेने की मांग की।
इसके अलावा 26,000 रुपये मासिक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन, 10,000 रुपये मासिक पेंशन, सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई का निर्णय वापस लेने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक, मनरेगा पुनः शुरू करने, खाली सरकारी पदों को भरने और पुरानी पेंशन बहाल करने सहित कई मांगें रखी गईं।ज्ञापन सौंपने से पूर्व श्रमिकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यक्रम को श्रमिक नेता भवानी सिंह शेखावत और लल्लन प्रसाद ने संबोधित किया, जबकि ज्ञापन का वाचन महेंद्र गुर्जर ने किया।इस दौरान मनीष शर्मा, ध्रुव रघुवंशी, नाहर सिंह, विकास निहोरे, संतोष परिहार, कैलाश डाबी, नसीर लाला, संदीप सिंह सोलंकी, घनश्याम प्रजापति, भूरालाल गंगाराम, कल्पना राजू, सुधा कल्याण, राधाबाई सहित सैकड़ों कर्मचारी उपस्थित रहे।

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