परिवार को लगा गहरा मानसिक और भावनात्मक झटका
दुनियाभर में जिस तरह से प्रजनन से संबंधित समस्याओं के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इसने गर्भधारण के वैकल्पिक तरीकों की तरफ बढ़ने के लिए लोगों को मजबूर कर दिया है। लंबे समय से गर्भधारण करने की कोशिश में लगे दंपतियों के लिए आईवीएफ यानि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन वरदान साबित हो रही है आईवीएफ एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें प्रयोगशाला में महिला के शरीर से लिए गए अंडे और पुरुष के शुक्राणुओं को मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है, इसे फिर गर्भाशय में ट्रांसप्लांट किया जाता है। जिन दंपतियों को सामान्य गर्भधारण में दिक्कत हो रही है उनके लिए आईवीएफ बड़ी उम्मीद साबित हो रहा है।आईवीएफ की मांग दुनियाभर में तेजी से बढ़ भी रही है।आईवीएफ पर लोगों की निर्भरता कितनी अधिक हो गई है, ये इस बात से स्पष्ट होता है कि मौजूदा समय में ब्रिटेन के हर क्लासरूम में औसतन एक बच्चा आईवीएफ से जन्मा हुआ देखा जा रहा है।आईवीएफ ने लाखों परिवारों को बच्चे पाने में मदद की है, लेकिन इन सफल कहानियों के पीछे कई मामलों में परेशान करने वाली सच्चाई भी छिपी है। जब यह सिस्टम किसी कारण से फेल होता है, तो इसके नतीजे कितने हैरान करने वाले हो सकते हैं इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
30 साल बाद पता चला, किसी और के बच्चे को मान रहे थे अपना
ऑस्ट्रेलिया में आईवीएफ में गड़बड़ी का एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जुड़वा बहनें साशा जाफ्रांस्की और उनकी बहन को अपनी असली पहचान के बारे में तब पता चला, जब वे अपना 30वां जन्मदिन मना रही थीं।
एक आनुवंशिक परीक्षण 'एनसेंटरी डीएनए' टेस्ट के दौरान जो खुलासा हुआ उसने दोनों के पैरों के तले से जमीन खिसका दी।
टेस्ट में पता चला कि असल में वे दोनों जैविक रूप से उन माता-पिता की संतानें थीं ही नहीं जिन्होंने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया था।
आगे की जांच से पता चला कि साल 1995 में, सिडनी के 'रॉयल नॉर्थ शोर हॉस्पिटल' में जिस आईवीएफ की मदद से इन जुड़वा बहनों का जन्म हुआ था, उस दौरान उनकी मां (जिसका नाम पेनी था) के गर्भ में गलती से किसी और का भ्रूण डाल दिया गया था।चौंकाने वाले खुलासों के बाद ये मामला और आगे बढ़ा जिसमें डीएनए टेस्ट से एक दिल दहला देने वाली सच्चाई सामने आई। ये जुड़वां बच्चे असल में एक दूसरे कपल के थे, जो उसी क्लिनिक में पेनी के साथ ही इलाज करवा रहे थे।पेनी ने अपनी बेटियों के बारे में कहा, 'मैंने उन्हें जन्म दिया था, वे मेरी बेटियां थीं। मुझे कभी यह ख्याल भी नहीं आया कि वे मेरी नहीं हैं। 30 साल पहले जो गलती हुई थी, हमें किसी तरह उसके साथ ही जीना होगा और यह वास्तव में बहुत बुरा है, ऐसा नहीं होना चाहिए था।
फर्टिलिटी क्लिनिक में लापरवाही के ढेरों मामले
ऑस्ट्रेलिया में वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले ब्रिस्बेन में एक महिला ने अजनबी के बच्चे को जन्म दिया था। आईवीएफ क्लिनिक में उसके गर्भ में गलती से किसी और का भ्रूण डाल दिया गया था। जिस बाद में हॉस्पिटल वालों ने 'इंसानी गलती' माना था।
- एक और मामले में, ब्रिस्बेन में ही एक फर्टिलिटी क्लिनिक में स्पर्म की अदला-बदली हो गई थी। इसके चलते एक गोरे जोड़े के यहां मिश्रित नस्ल के बच्चे का जन्म हुआ था।
- साल 2019 में कैलिफोर्निया में, दो जोड़ों को पता चला कि आईवीएफ में हुई गड़बड़ी के कारण वे एक-दूसरे की बेटियों को पाल रहे थे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस तरह के मामलों में ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों का कहना है कि कानून उस महिला को प्राथमिकता देता है जो बच्चे को जन्म देती है। इसका मतलब है कि जैविक माता-पिता का दावा बहुत कम हो जाता है, भले ही गलती साबित हो चुकी हो।वैसे तो आईवीएफ में इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं हालांकि हाल के वर्षों में कई ऐसे केस सामने आ चुके हैं जहां आईवीएफ के दौरान एंब्रियो मिक्सअप के चलते माता-पिता किसी और के बच्चों को पाल रहे हैं।2018 के एक अमेरिकी अध्ययन का अनुमान है कि आईवीएफ में इस तरह की गलतियां लगभग हर 2,000 केस में से एक में हो सकती हैं।
आईवीएफ में एम्ब्रियो में गड़बड़ी के मामले
दुनियाभर में पिछले चार दशकों में आईवीएफ के जरिए लाखों दंपत्तियों को संतान सुख मिला है। दावा किया जाता रहा है कि आईवीएफ में एम्ब्रियो में गड़बड़ी के मामले न के बराबर होते हैं, पर हाल के वर्षों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया से ऐसे कई मामले रिपोर्ट किए गए हैं।वैसे तो इसका कोई सटीक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स से पता चला है कि दुनियाभर में एम्ब्रियो की अदला-बदली, उनके खराब होने या खो जाने से जुड़े 205 कानूनी मामले सामने आए हैं। आईवीएफ साइकल की कुल संख्या को देखते हुए, ऐसी घटनाएं बहुत ही दुर्लभ मानी जाती हैं।

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