अमरपाटन। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अमरपाटन में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थाओं के विरोध में अखिल विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी एवं छात्र-छात्राएं बुधवार को सड़क पर उतर आए और अनशन पर बैठ गए। छात्रों का आरोप है कि महाविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है, लेकिन बार-बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद प्रभारी प्राचार्य द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।छात्रों के आंदोलन के दौरान जब जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष से कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल किया गया, तो उनके बयान ने पूरे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। जनभागीदारी अध्यक्ष ने बताया कि सामान्य परिषद की बैठकें 31 जुलाई 2025 एवं 03 सितंबर 2025 को आयोजित की गई थीं, जिनमें महाविद्यालय के विकास, आवश्यक संसाधनों एवं बजट से संबंधित प्रस्ताव विधिवत रूप से पारित किए जा चुके हैं।अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “इन प्रस्तावों को आज तक प्रभारी प्राचार्य द्वारा लागू क्यों नहीं किया गया, यह समझ से परे है। इस गंभीर लापरवाही की जानकारी मैं आयुक्त महोदय, उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर दूंगा।” उन्होंने यह भी संकेत दिए कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो मामला उच्च स्तर तक उठाया जाएगा।छात्रों का कहना है कि प्रभारी प्राचार्य महाविद्यालय के संचालन में पूरी तरह असफल हो चुके हैं। जब स्वीकृत बजट और पारित प्रस्ताव मौजूद हैं, उसके बावजूद छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए अनशन जैसा कदम उठाना पड़ रहा है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन पर ही जाती है।इस पूरे मामले में अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, रीवा की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। छात्रों का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन, आंदोलन और अब अनशन के बावजूद रीवा कार्यालय की ओर से कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिससे कॉलेज प्रशासन बेलगाम बना हुआ है।छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही प्रभारी प्राचार्य के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं हुई और महाविद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन एवं उच्च शिक्षा विभाग, रीवा की होगी।