भीलवाड़ा शहर के इंदिरा मार्केट और रेलवे स्टेशन के पास लंबे समय से पुराने कपड़ों का कारोबार करने वाले रेडी विक्रेताओं और स्थानीय व्यापारियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कुछ दिन पहले व्यापारियों ने आरोप लगाया था कि रेडी वाले न केवल अतिक्रमण कर रहे हैं, बल्कि उनके कारण ग्राहकों को आवाजाही में दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसी मुद्दे पर व्यापारियों ने सोमवार को दो घंटे तक अपनी दुकानों का शटर डाउन कर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर सांकेतिक धरना दिया था।

व्यापारियों की इस कार्रवाई के बाद अब रेडी विक्रेता भी खुलकर सामने आ गए हैं। रेडी वालों का कहना है कि वे लगभग 80 वर्षों से इंदिरा मार्केट आसपास पुराने कपड़े बेचकर ही अपने परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि उनके पूर्वजों ने भी इसी इलाके में निवास किया था और यह कारोबार उनके लिए पीढ़ियों से जीविका का एकमात्र साधन है। रेडी विक्रेताओं का आरोप है कि बड़े व्यापारी न सिर्फ उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए झगड़ा भी करते हैं। कुछ विक्रेताओं ने यह भी कहा कि उन पर कई बार झूठे आरोप लगाए जाते हैं और पानी फेंककर अपमानित तक किया जाता है।

रेडी वालों के अनुसार पहले व्यापारी रविवार को अपनी दुकानें बंद रखते थे, लेकिन अब उन्होंने रविवार को भी दुकानें खोलना शुरू कर दिया है, जिससे रेडी वालो की आय पर सीधा असर पड़ा है। रेडी समाज से जुड़े बुजुर्गों और महिलाओं ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं और न ही उनके पास कोई अन्य रोज़गार का विकल्प है। ऐसे में यदि उन्हें रेडी लगाने से रोका गया तो उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा। एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होते हुए कहा कि “अगर हम पुराने कपड़े बेचकर पेट नहीं भर पाएंगे तो मजबूरी में गलत रास्ते पर जाना पड़ेगा, चोरी करनी पड़ेगी या फिर कानून अपने हाथ में लेना पड़ेगा।”मामले को लेकर घुमंतु और अर्ध-घुमंतु समाज भी सक्रिय हो गया है। जानकारी के अनुसार गुरुवार को यह समाज एकजुट होकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगा और अपने पक्ष को विस्तार से रखेगा।इंदिरा मार्केट क्षेत्र में चल रहा यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। आगामी दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह कलेक्टर की मध्यस्थता और समाधान पर निर्भर करेगा।