भिंड जिले के मिहोना कस्बे में एक बार फिर अवैध रूप से संचालित झोलाछाप क्लीनिकों की लापरवाही सामने आई है। बस स्टैंड के पास चल रहे एक कथित बंगाली क्लीनिक में मामूली बुखार का इलाज कराने पहुंचे 45 वर्षीय युवक की इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद मौत हो गई। इस घटना ने न केवल परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।मृतक की पहचान अखिलेंद्र सिंह राजावत उर्फ नीरू, निवासी लिटा के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार अखिलेंद्र को सर्दी-जुकाम और हल्का बुखार था, जिसके इलाज के लिए वह उक्त निजी क्लीनिक पहुंचा था। आरोप है कि बिना किसी जांच और पुख्ता चिकित्सीय प्रक्रिया के कथित डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगा दिया और टेबल पर लिटा दिया।इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों बाद युवक की हालत अचानक बिगड़ गई। उसके मुंह से झाग निकलने लगे और वह तड़पने लगा। क्लीनिक में मौजूद डॉक्टर मरीज को संभाल नहीं सका और कुछ ही देर में युवक ने दम तोड़ दिया।घटना के बाद क्लीनिक में अफरा-तफरी मच गई। युवक की मौत होते ही आरोपी झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक का शटर बंद कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और जमकर हंगामा किया।मिहोना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नगर निरीक्षक विजय कैन ने बताया कि निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान युवक की संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है। मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगा और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि मिहोना कस्बे में लंबे समय से कई अवैध और बिना पंजीकरण के क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम कब लगेगी और ऐसी मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा।