मथुरा-वृंदावन की पावन नगरी में मंगलवार को संघ, राजनीति और संत समाज का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। रुक्मणी विहार स्थित महामंडलेश्वर यतींद्र गिरी महाराज के नवनिर्मित जीवनदीप आश्रम का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित कर किया और आश्रम को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने यतींद्र गिरी महाराज द्वारा लिखित हिंदी और अंग्रेजी पुस्तकों का विमोचन भी किया।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की लंबी श्रृंखला देखने को मिली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी और साध्वी ऋतंभरा सहित कई प्रमुख संत और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।जनसभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने आश्रमों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आश्रम केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की पाठशालाएं हैं, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसे केंद्रों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है।अपने संबोधन में भागवत ने राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बढ़ती घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से आए लोगों की पहचान जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के संतुलन और परिवार के स्वास्थ्य के लिए तीन संतानों का विचार उपयुक्त हो सकता है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संतों और अतिथियों ने भी अपने विचार साझा किए और आश्रम को आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा का केंद्र बताया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा।