मथुरा में गौ रक्षा को लेकर एक नई पहल सामने आई है, जहां शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा चतुरंगिणी सेना के गठन की घोषणा के बाद संत समाज में चर्चा तेज हो गई है। इस सेना का उद्देश्य गौ माता की रक्षा करना बताया जा रहा है, जिसके तहत करीब 2.18 लाख गौ सैनिक तैयार करने का संकल्प लिया गया है।शंकराचार्य का कहना है कि देश में गौवंश की सुरक्षा के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं और इसी उद्देश्य से इस सेना का गठन किया जा रहा है। इसमें ऐसे स्वयंसेवकों को शामिल किया जाएगा जो गौ सेवा और संरक्षण के लिए समर्पित रहेंगे।इस पहल पर दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि देश में पहले से कई संगठन कार्यरत हैं, लेकिन यह भी गौ रक्षा के लिए एक प्रयास है। उन्होंने “रोको, टोको और ठोको” जैसे शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य गौ तस्करी को रोकना है।वहीं अनमोल दास महाराज ने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यदि इससे समाज में जागरूकता बढ़ती है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। साध्वी इंदुलेखा ने गौ सेवा को आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए समाज से आगे आने की अपील की।इस बीच सौरभ कौशिक ने कहा कि किसी भी संगठन को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए, ताकि समाज में शांति और व्यवस्था बनी रहे।चतुरंगिणी सेना की घोषणा के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संगठन भविष्य में किस तरह कार्य करता है और गौ संरक्षण के क्षेत्र में क्या भूमिका निभाता है।