गांधी शहीद दिवस पर मथुरा में सर्वधर्म प्रार्थना, अहिंसा और समभाव का संदेश
मथुरा
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 78वें शहीद दिवस पर अखिल भारतीय साम्प्रदायिकता विरोधी समिति के तत्वावधान में विकास मार्केट स्थित गांधी प्रतिमा सेनानी स्तंभ पर सर्वधर्म प्रार्थना एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गांधी जी के प्रासंगिक विचारों, शिक्षा के प्रति दृष्टि और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया गया।वक्ताओं ने अहिंसा और सर्वधर्म समभाव को भारत की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विश्व कल्याण का मार्ग बताया। सभा की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष शिवदत्त चतुर्वेदी ने की।इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजनाओं और विचारों से दूरी बनाई जा रही है। उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रोजगार को अधिकार के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण था, लेकिन सीमित बजट के कारण इसकी प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।समिति अध्यक्ष शिवदत्त चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि बढ़ती घृणा, हिंसा, विभाजन और विषमता के बीच गांधी जी के जीवन और बलिदान से प्रेरणा लेना आवश्यक है। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अहिंसक प्रतिरोध का आह्वान किया और साम्प्रदायिकता को देश की एकता के लिए घातक बताया।कार्यक्रम में गांधीवादी वरिष्ठ नेता बाबू रमेश चंद्र गर्ग, गफ्फार अब्बास (एडवोकेट), अशोक कुंदन लाल चतुर्वेदी, कुंवर सिंह निषाद, दिनेश बिंदल, देवेंद्र पाल (इप्टा), पार्षद पुनीत बघेल, रूपा लवानिया सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अल्बर्ट आइंस्टीन के गांधी जी पर दिए गए कथन का स्मरण करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी उनके व्यक्तित्व पर आश्चर्य करेंगी। साथ ही यह भी बताया गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सर्वप्रथम गांधी जी को ‘राष्ट्रपिता’ की संज्ञा दी थी।कार्यक्रम का संचालन जिला कांग्रेस महामंत्री वैद्य मनोज गौड ने किया। उन्होंने साम्प्रदायिक राजनीति और जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने की प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त की। सभा का समापन दो मिनट के मौन और राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि के साथ हुआ।

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