बालाघाट (मध्य प्रदेश)।
बालाघाट जिले से बेरोजगार युवाओं के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जिले में आयोजित रोजगार मेले के माध्यम से चयनित युवाओं को बैंगलोर में टीवीएस और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों में रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन युवाओं को बैंगलोर के बजाय तमिलनाडु भेज दिया गया। इससे दर्जन भर से अधिक युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।युवाओं का आरोप है कि रोजगार मेले में उन्हें जिस कंपनी और स्थान की जानकारी दी गई थी, उसे अचानक बदल दिया गया। तमिलनाडु पहुंचने के बाद न तो उन्हें बताई गई कंपनी मिली और न ही रोजगार को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। वहां की परिस्थितियां बेहद खराब बताई जा रही हैं।तमिलनाडु से युवाओं द्वारा जारी किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस स्थान पर उन्हें ठहराया गया है, वह जंगल से घिरा हुआ इलाका है। उनके रहने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। सारा सामान घर के बाहर पड़ा हुआ है और कड़ाके की ठंड में युवक अलाव जलाकर किसी तरह रात गुजार रहे हैं। युवाओं का कहना है कि न खाने की व्यवस्था है और न ही रहने का कोई पुख्ता इंतजाम है। मकान में गंदगी फैली हुई है और हालात अमानवीय हैं।युवाओं का यह वीडियो सबसे पहले उनके परिजनों तक पहुंचा, जिसके बाद पंवार समाज के जिलाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता विशाल बिसेन ने जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि या तो युवाओं को उसी कंपनी और स्थान पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए, जिसके लिए उन्हें भेजा गया था, या फिर सभी युवाओं को सुरक्षित रूप से वापस बुलाया जाए।इस मामले को सांसद भारती पारधी ने भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन से चर्चा कर युवाओं को जल्द राहत दिलाने का आश्वासन दिया है।हालांकि, अब तक जिला प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में खुलकर बयान देने से बचता नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर बेरोजगार युवाओं के साथ किया गया एक बड़ा छलावा। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।