मऊगंज।
नवगठित मऊगंज जिले में बीती रात उस समय हालात तनावपूर्ण हो गए, जब एक निजी जमीन विवाद के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल के हस्तक्षेप को लेकर जनता का गुस्सा फूट पड़ा। मामला नेशनल हाईवे-135 के बराब मोड़ का है, जहां करीब दो घंटे तक हाई-वोल्टेज हंगामा चलता रहा। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को विधायक को सुरक्षा घेरे में लेकर मौके से हटाना पड़ा।जानकारी के अनुसार, मऊगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत लल्लू पांडे और विनोद खोडबानी के बीच पुश्तैनी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब दोनों पक्ष आपस में बातचीत कर रहे थे, उसी दौरान विधायक प्रदीप पटेल वहां पहुंचे और कथित तौर पर विनोद खोडबानी के पक्ष में धरने पर बैठ गए। विधायक के इस कदम से दूसरा पक्ष और स्थानीय ग्रामीण भड़क उठे।स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब मौके पर मौजूद लोगों ने विधायक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि प्रशासन और पुलिस एक पक्ष के दबाव में काम कर रही है। इसी दौरान लल्लू पांडे ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए आत्मदाह की चेतावनी भी दी, जिससे माहौल और गंभीर हो गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला दो पक्षों के बीच कानूनी और निजी विवाद है, जो न्यायालय और राजस्व विभाग में लंबित है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि का खुले तौर पर एक पक्ष का समर्थन करना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी गई कि पुलिस कथित तौर पर विधायक के इशारे पर कार्रवाई कर रही है।वहीं, दूसरे पक्ष विनोद खोडबानी का कहना है कि जमीन उनकी पुश्तैनी है और उन्हें कब्जा छीने जाने की धमकी मिल रही थी, जिसके चलते उन्होंने विधायक को सूचना दी थी।विवाद बढ़ने पर विधायक प्रदीप पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य केवल टकराव को रोकना और शांति बनाए रखना था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए 10 लाख रुपये की मांग जैसे आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा बताया। विधायक ने स्पष्ट किया कि जमीन विवाद का मामला तहसीलदार के पास लंबित है और अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।हालांकि, बढ़ती भीड़, विरोध और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए विधायक को मौके से सुरक्षित स्थान पर भेजना उचित समझा।इस घटना के बाद मऊगंज जिले में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार सामने आ रहे विवाद और अब जनप्रतिनिधि के खिलाफ खुला विरोध यह संकेत देता है कि जिले में जमीनी स्तर पर असंतोष गहराता जा रहा है।