सियासी उलटफेर की आहट: बिहार में CM और डिप्टी CM पदों को लेकर चर्चा जोरों पर
नई दिल्ली। बिहार (Bihar) की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सत्ता संतुलन बदलने की पटकथा लगभग तैयार है, जिसमें अब तक ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही बीजेपी (BJP) मुख्यमंत्री पद संभाल सकती है, जबकि जेडीयू (JDU) नई भूमिका में नजर आएगी।
सत्ता समीकरण बदलने की तैयारी
बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था के तहत बीजेपी को मुख्यमंत्री पद दिया जाएगा। वहीं, जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना है। इस संभावित बदलाव से राज्य की मौजूदा राजनीतिक संरचना पूरी तरह बदल सकती है और गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन नया रूप ले सकता है।
नीतीश कुमार की नई भूमिका तय?
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में नई पारी शुरू कर सकते हैं। इससे पहले वे मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि वे केंद्र में मंत्री बनने के बजाय राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
मंत्रालयों का बंटवारा और फॉर्मूला
नई सरकार के फॉर्मूले के तहत बीजेपी को मुख्यमंत्री पद के साथ करीब 15 मंत्री पद मिल सकते हैं। वहीं जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पदों सहित 16 मंत्री पद दिए जाने की चर्चा है। गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रह सकता है, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू को मिलने की संभावना है।
निशांत कुमार की एंट्री पर नजर
इस राजनीतिक बदलाव के बीच निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे डिप्टी सीएम के रूप में जेडीयू के किसी वरिष्ठ नेता को मौका मिलेगा। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे और संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर ध्यान देंगे।
सहयोगी दलों का समीकरण बरकरार
गठबंधन में सहयोगी दलों के लिए पुराना फॉर्मूला ही लागू रहने की संभावना है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो मंत्री पद, जबकि अन्य सहयोगी दलों को एक-एक मंत्री पद मिल सकते हैं। नई सरकार का फोकस आगामी चुनावों की तैयारी और वादों को पूरा करने पर रहेगा।
सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी अटकलें
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी को लेकर नीतीश कुमार के बयान के बाद अटकलें तेज हो गई हैं। उन्होंने इशारों में कहा था कि “ये बिहार को संभालेंगे”, जिससे उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जाने लगा। हालांकि, जेडीयू की ओर से इन कयासों को खारिज किया गया है और कहा गया है कि ऐसा कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसके बावजूद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

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