भीलवाड़ा। रंगों का त्योहार धुलंडी मंगलवार को शहर और जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, लेकिन इस बार पर्व पर चंद्र ग्रहण का साया साफ तौर पर देखने को मिला। ग्रहण के सूतक काल और धार्मिक मान्यताओं के चलते त्योहार का रंग कुछ फीका नजर आया और शहर में इसका मिला-जुला असर दिखाई दिया।सुबह से ही शहरवासियों के बीच ग्रहण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। कई लोगों ने धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए रंगों से दूरी बनाए रखी, जबकि कुछ लोगों ने परंपरा को निभाते हुए गुलाल खेलकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। ग्रहण का असर बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। शहर के आधे से अधिक प्रमुख बाजार खुले रहे, लेकिन ग्राहकों की भीड़ कम रही। कई व्यापारियों ने ‘रंग पर्व’ और ग्रहण को ध्यान में रखते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। मंदिरों के पट भी ग्रहण के कारण सुबह से ही बंद रहे।हालांकि ग्रहण के प्रभाव के बावजूद शहर के कुछ हिस्सों में होली का उत्साह चरम पर रहा। पुराने भीलवाड़ा क्षेत्र में युवाओं की टोलियां ढोल-नगाड़ों की थाप पर सड़कों पर निकलीं और जमकर रंग-गुलाल खेला। युवाओं ने पारंपरिक अंदाज में एक-दूसरे को रंग लगाकर त्योहार का आनंद लिया।वहीं अग्रवाल उत्सव भवन में अग्रवाल समाज के लोगों ने फूलों और गुलाल से होली खेली। भक्ति भजनों की धुन पर समाजजन नृत्य करते नजर आए और आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं।कुल मिलाकर भीलवाड़ा में इस बार धुलंडी का पर्व आस्था और परंपरा के बीच संतुलन के साथ मनाया गया, जहां एक ओर धार्मिक मान्यताओं का पालन किया गया तो दूसरी ओर रंगोत्सव की उमंग भी देखने को मिली।