रीवा में गांजा बरामदगी के एक मामले में विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा की गई जांच और जब्ती प्रक्रिया में एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला संदेह के घेरे में आ गया।

पुलिस का दावा

पुलिस के अनुसार, 3 अप्रैल 2019 की रात करीब 8:15 बजे थाना समान में पदस्थ उपनिरीक्षक लक्ष्मी बागरी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पी.के. स्कूल के पीछे स्थित एक मकान में चार युवक ठहरे हुए हैं, जिनके पास काले रंग के बैग में गांजा रखा हुआ है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी, जहां आदर्श वर्मा, योगेश द्विवेदी उर्फ सूरज सहित अन्य युवक मौजूद मिले। तलाशी के दौरान काले बैग से करीब 10 किलोग्राम गांजा बरामद होने का दावा किया गया।

इस मामले में थाना समान में अपराध क्रमांक 104/2019 दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अगले दिन सभी को विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट, रीवा में पेश किया गया, जहां से उन्हें केंद्रीय जेल रीवा भेज दिया गया था। पुलिस ने विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

अदालत में सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उपनिरीक्षक लक्ष्मी बागरी सहित कुल आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आनंदमूर्ति तिवारी एवं ओम शंकर तिवारी ने गवाहों से गहन जिरह की और उच्चतम न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया।

न्यायालय का फैसला

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब्ती और जांच प्रक्रिया के दौरान एनडीपीएस कानून के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। अभियोजन के साक्ष्य संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके। इस आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया।

कानूनी संदेश

यह फैसला एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा विधि सम्मत प्रक्रिया के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं, बल्कि कानून के हर प्रावधान का पालन अनिवार्य है।