नगर निगम परिसर में मजार का अवैध हिस्सा जमींदोज
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में अल सुबह नगर निगम का ‘पीला पंजा’ पूरी ताकत के साथ गरजा। नगर निगम परिसर स्थित नजरअली मिल कम्पाउंड में बनी मजार के आसपास वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जे पर निगम की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे जमींदोज कर दिया। कार्रवाई इतनी गोपनीय और तेज रही कि जब तक शहर जागता, तब तक तीन जेसीबी मशीनों ने अवैध बाउंड्री वॉल, टीन शेड और फेंसिंग को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। किसी भी तरह के विरोध की आशंका को देखते हुए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था।नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने बताया कि मजार के आसपास विशेष वर्ग द्वारा लंबे समय से शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण किया गया था। इस संबंध में निगम द्वारा पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन तय समय-सीमा बीतने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया। नियमों का उल्लंघन होने पर शनिवार तड़के तीन जेसीबी, कटर मशीनें और भारी डंपरों के साथ रिमूवल टीम मौके पर पहुंची।सीएसपी राहुल देशमुख ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से तीन थानों के टीआई सहित 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कार्रवाई के दौरान मजार के बाहर बने अवैध शेड और दीवार को तोड़ने के साथ ही रास्ते में बाधा बन रहे करीब एक दर्जन पेड़ों को भी हटाया गया।
एक्सटेंशन
हिन्दू जागरण मंच मालवा प्रांत कार्यकारिणी सदस्य अर्जुन भदौरिया ने बताया कि नगर निगम के पास उपलब्ध सरकारी खसरा और बी-1 दस्तावेजों में इस मजार या किसी अन्य निर्माण का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सन् 2000 से पहले के सैटेलाइट फुटेज साफ दर्शाते हैं कि उस स्थान पर उस समय कोई मजार या निर्माण मौजूद नहीं था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह शासकीय भूमि पर किया गया अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने सभी पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर ही यह कार्रवाई की है और अफवाह फैलाने वालों पर प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।वहीं हिन्दू जागरण मंच के संयोजक रितेश माहेश्वरी ने कहा कि पूरी मजार ही अवैध रूप से कब्जा कर बनाई गई है और प्रशासन को इसे पूरी तरह हटाया जाना चाहिए।दूसरी ओर, मजार कमेटी के मोहम्मद गुफरान ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मजार करीब 150 साल पुरानी है और यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने ही पहले यहां फेंसिंग करवाई थी, जिसे अब तोड़ा जा रहा है। साथ ही रमजान का हवाला देते हुए कहा कि शेड हटने से इबादत में परेशानी होगी।

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