भोपाल। अब प्रदेश में केवल मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ही ‘श्रमजीवी पत्रकार’ नाम का प्रयोग कर सकेगा। इस नाम से पंजीकृत अन्य सभी संगठनों को अपना नाम बदलना होगा। इसके साथ ही भविष्य में इस नाम से किसी नए संगठन का पंजीयन भी नहीं किया जाएगा। यह आदेश रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाएं, भोपाल द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में जारी किया गया है।रजिस्ट्रार ने भोपाल-नर्मदापुरम, इंदौर, उज्जैन, सागर, ग्वालियर-चंबल, रीवा-शहडोल और जबलपुर संभाग के सहायक रजिस्ट्रारों को निर्देशित किया है कि उनके कार्यालयों में पंजीकृत ‘श्रमजीवी पत्रकार’ नाम से संचालित संगठनों के संबंध में विधि अनुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए नाम संशोधन कराया जाए। इसके साथ ही नए पंजीयन के दौरान गहन जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।यह आदेश मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के पक्ष में पारित निर्णय के अनुपालन में जारी किया गया है। इस मुद्दे पर संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने समान या मिलते-जुलते नामों से पंजीकृत संगठनों के खिलाफ जिला, संभाग और अंततः उच्च न्यायालय तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी।उच्च न्यायालय, जबलपुर के न्यायाधीश जी.एस. अहलूवालिया ने 06 सितंबर 2024 को स्पष्ट निर्णय दिया था कि कोई अन्य संगठन ‘श्रमजीवी पत्रकार’ नाम का उपयोग नहीं कर सकता। अदालत ने रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन को 24 अक्टूबर 2024 तक दोनों पक्षों की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेने के निर्देश भी दिए थे।इसके बावजूद कुछ संगठन ‘श्रमजीवी पत्रकार’ नाम से पंजीकृत रह गए और जिला/संभाग स्तर पर उप पंजीयकों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पत्रकारों में भ्रम की स्थिति बनी रही। इसके बाद प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति संलग्न कर रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाएं, भोपाल से पत्राचार कर कार्रवाई की मांग की।अब रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाएं, भोपाल ने प्रदेशभर के सभी उप पंजीयकों को आदेश जारी कर दिया है, जिसके तहत ‘श्रमजीवी पत्रकार’ नाम से संचालित अन्य संगठनों को अपना नाम बदलना अनिवार्य होगा। इस आदेश के बाद प्रदेश में ‘श्रमजीवी पत्रकार’ नाम केवल मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ तक सीमित रहेगा।