वेटरनरी आयुर्वेद में पीजी डिप्लोमा को लेकर डुवासू में अहम बैठक
मथुरा। प्रस्तावित पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा इन वेटरनरी आयुर्वेद (PGDVA) को लेकर उत्तर प्रदेश पं. दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ-अनुसंधान संस्थान (डुवासू), मथुरा में 17 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का उद्देश्य इस नए पाठ्यक्रम के लिए विनियामक ढांचे और पाठ्यक्रम संरचना को अंतिम रूप देना था। बैठक की अध्यक्षता डुवासू के माननीय कुलपति डॉ. अभिजित मित्र ने की।इस अवसर पर पशु चिकित्सा और आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े देश के कई वरिष्ठ और अनुभवी विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से डॉ. के. एम. एल. पाठक, पूर्व उप-महानिदेशक (पशु विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली एवं पूर्व कुलपति, डुवासू; डॉ. देवेंद्र स्वरूप, पूर्व निदेशक, आईसीएआर–केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, फरह, मथुरा; तथा डॉ. रमेश सोमवंशी, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली ने अपने विचार साझा किए।इसके अतिरिक्त डॉ. हरि राम भदौरिया, पूर्व संयुक्त निदेशक, आयुर्वेद निदेशालय, उत्तर प्रदेश एवं पूर्व सदस्य, केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद, भारत सरकार, नई दिल्ली तथा डॉ. शम्भु पटेल, एसोसिएट प्रोफेसर, द्रव्यगुण विभाग, विवेक कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक साइंसेज एवं हॉस्पिटल, बिजनौर, उत्तर प्रदेश ने भी बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।बैठक के दौरान प्रस्तावित पाठ्यक्रम की संरचना, नियामक नियमों के अनुपालन, आवश्यक आधारभूत ढांचे, संकाय की आवश्यकता, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन पद्धति जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि पाठ्यक्रम इस तरह से तैयार किया जाए, जिससे पशु चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में इसका प्रभावी उपयोग हो।बैठक का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करना रहा, जो अकादमिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ व्यावहारिक और रोजगारोन्मुखी भी हो। अंत में सभी विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि पीजी डिप्लोमा इन वेटरनरी आयुर्वेद भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पशु चिकित्सा क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला कदम साबित होगा।

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