मातमोर जैन तीर्थ की पवित्रता पर संकट, जैन समाज ने उठाई आवाज
खरगोन। देवास जिले की बागली तहसील में स्थित प्राचीन ऋषत्रिभुवनभानु पार्श्वनाथ श्री मणिभद्रवीर जैन तीर्थ मातमोर की पवित्रता, सुरक्षा और संरक्षण को लेकर जैन समाज में गहरी चिंता व्याप्त है। इसी को लेकर जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा और तीर्थ क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट का आरोप है कि तीर्थ क्षेत्र के आसपास अवैध रूप से पट्टों का वितरण किया जा रहा है, जिसके चलते गैर-जैन लोगों द्वारा मुर्गी, बकरी पालन जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संस्था का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां जैन धर्म की अहिंसा, शुद्धता और सात्विक जीवन मूल्यों के पूर्णतः विपरीत हैं, जिससे तीर्थ की धार्मिक गरिमा को ठेस पहुंच रही है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि तीर्थ मार्ग और आसपास के क्षेत्र में मांस-मदिरा की दुकानें संचालित हो रही हैं। साथ ही अवैध कब्जे और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी से साधु-संतों एवं दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जैन समाज का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो तीर्थ की पवित्रता और पहचान पर संकट और गहरा सकता है।जैन समाज ने मांग की है कि तीर्थ क्षेत्र के आसपास दिए गए सभी अवैध पट्टों पर तुरंत रोक लगाई जाए, मांस और मदिरा की दुकानों को बंद कराया जाए, अवैध कब्जों को हटाया जाए तथा पूरे क्षेत्र को शाकाहारी और नशामुक्त घोषित किया जाए। इसके साथ ही तीर्थ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थायी पुलिस व्यवस्था की भी मांग की गई है।जैन समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से आग्रह किया कि मातमोर जैसे प्राचीन और पवित्र जैन तीर्थ की धार्मिक आस्था और परंपराओं की रक्षा के लिए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जैन समाज आंदोलन के लिए भी मजबूर हो सकता है।

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