RTO के नाम पर अवैध वसूली, पत्रकार को जान से मारने की धमकी — प्रशासन मौन
रीवा।
नेशनल हाईवे-30 इन दिनों सिर्फ यातायात का मार्ग नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, भय और अवैध वसूली का खुला अड्डा बन चुका है। परिवहन विभाग (RTO) की आड़ में हाईवे पर खुलेआम गुंडागर्दी और उगाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीच सड़क RTO के नाम पर अवैध उगाही
जानकारी के अनुसार, जोगनिहाई टोल प्लाजा से लगभग 1 किलोमीटर आगे सुरसा खुर्द गांव के पास नेशनल हाईवे-30 पर रॉन्ग साइड में एक गाड़ी खड़ी कर कुछ अज्ञात लोग ट्रकों को रोक रहे थे। आरोप है कि यह लोग स्वयं को RTO से जुड़ा बताकर चालकों से अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे।
जब मौके से गुजर रहे एक सजग पत्रकार ने इस संदिग्ध गतिविधि का वीडियो बनाना शुरू किया, तो RTO लिखी गाड़ी में सवार लोग तुरंत वहां से भाग खड़े हुए।
ट्रक चालक से छीने गए मूल दस्तावेज
मौके पर मौजूद एक ट्रक चालक ने बताया कि आरोपितों ने उससे पैसे की मांग की। पैसे देने से इनकार करने पर उसके वाहन के सभी मूल दस्तावेज और टीपी जब्त कर लिए गए। जाते समय उससे कहा गया—
“चंद्रभूषण गौतम या अंकित पाठक को पैसे दे देना, तभी फाइल वापस मिलेगी।”
पत्रकार को धमकी, लोकतंत्र पर हमला
मामले की कवरेज कर रहे पत्रकार का पीछा बाद में बिना नंबर प्लेट की सफेद बोलेरो ने किया। बोलेरो में सवार नकाबपोश लोगों ने पत्रकार के साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देते हुए कहा—
“किसी दिन गाड़ी की ठोकर लगेगी, सारी पत्रकारिता निकल जाएगी। ज्यादा मत उछालो।”
यह घटना न केवल एक पत्रकार को डराने की कोशिश है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला मानी जा रही है।
डायल-112 की चौंकाने वाली संवेदनहीनता
पीड़ित ट्रक चालक पूरी रात भूखा-प्यासा अपने दस्तावेजों के इंतजार में बैठा रहा। उसने मदद के लिए डायल-112 पर कॉल किया, लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली रही।
डायल-112 से कहा गया—
“RTO से जाकर मिलो, यह हमारा काम नहीं है।”
सवाल उठता है कि क्या हाईवे पर हो रही लूट, धमकी और अवैध वसूली रोकना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है?
RTO–गुंडा नेक्सस की आशंका
अगले दिन वही बिना नंबर की सफेद बोलेरो, जिससे पत्रकार को धमकी दी गई थी, RTO की चेकिंग वाली जगह पर खड़ी पाई गई।
दोनों गाड़ियों का एक साथ खड़ा होना इस बात की ओर इशारा करता है कि धमकी देने वाले गुंडे किसी न किसी रूप में परिवहन विभाग के संरक्षण में थे।
दस्तावेज लौटाने के बदले रिश्वत
भ्रष्टाचार की हद तब पार हो गई जब ट्रक चालक से उसके दस्तावेज लौटाने के बदले पहले 3500 रुपये मांगे गए। काफी मिन्नतों के बाद सौदा 2000 रुपये में तय हुआ।
रिश्वत लेने के बाद ही चालक को उसकी फाइल और वाहन वापस सौंपा गया।
कई गंभीर सवाल अब भी अनसुलझे
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चंद्रभूषण गौतम और अंकित पाठक कौन हैं, जो अवैध वसूली का पूरा मैनेजमेंट संभाल रहे हैं?
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RTO लिखी गाड़ी में बैठे नकाबपोश लोग आखिर कौन थे?
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बिना नंबर प्लेट की बोलेरो किसके इशारे पर पत्रकारों को धमका रही थी?
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क्या नेशनल हाईवे पर चल रही यह वसूली प्रशासनिक संरक्षण में हो रही है?
प्रशासन से सीधे सवाल
रीवा कलेक्टर डॉ. प्रतिभा पाल से सवाल:
क्या NH-30 पर बिना नंबर की गाड़ियों में गुंडों को उगाही और पत्रकारों को धमकाने की खुली छूट है?
रीवा SP शैलेंद्र सिंह चौहान से सवाल:
डायल-112 पर लूट की शिकायत करने वाले नागरिक को लुटेरों के पास भेजना किस नियम के तहत किया गया?
रीवा RTO मनीष त्रिपाठी से सवाल:
सरकारी गाड़ियों में बिना वर्दी और पहचान के अवैध वसूली कौन कर रहा है? क्या विभाग इससे अनजान है?
थाना प्रभारी से सवाल:
क्या आपके क्षेत्र में बिना नंबर की गाड़ियां खुलेआम धमकियां दे रही हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है?

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