खरगोन। खरगोन जिले के भगवापुरा क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां सुदूर पहाड़ी इलाके में निवास कर रहे सैकड़ों अनुसूचित जनजाति परिवार अपने मूलभूत अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। इन परिवारों का आरोप है कि वर्षों से प्रशासनिक रिकॉर्ड में उन्हें गलत सामाजिक श्रेणी में दर्ज किया गया है, जिसके कारण वे सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका रहन-सहन, रीति-रिवाज, बोली-भाषा और सामाजिक संरचना पूरी तरह आदिवासी समाज से मेल खाती है, इसके बावजूद उन्हें अनुसूचित जाति की श्रेणी में दर्ज किया गया है। इस गलत वर्गीकरण के चलते बिजली, पेयजल, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी इन परिवारों के लिए सपना बनी हुई हैं।पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे कई बार अपनी समस्या को लेकर शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष आवेदन दे चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले, समाधान नहीं। अब एक बार फिर सभी प्रभावित परिवार एकजुट होकर सामने आए हैं और प्रशासन से स्पष्ट मांग कर रहे हैं कि क्षेत्र का प्रशासनिक सर्वे कराया जाए, सामाजिक श्रेणी का सही निर्धारण हो और उन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग का वास्तविक लाभ तत्काल दिया जाए।परिवारों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई की जाती है, तो न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन की ओर हैं कि इन सैकड़ों परिवारों की जायज मांग पर कब तक संज्ञान लिया जाता है और शासन की योजनाएं कब धरातल पर उतरती हैं।