यह दस्तावेज “स्थानीय नस्ल की गौवंश अनुसंधान केंद्र की स्थापना एवं पंचगव्य उत्पादों के विकास” से संबंधित परियोजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। उक्त परियोजना की शुरुआत वर्ष 2012 में की गई थी, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से विधिवत स्वीकृति प्राप्त हुई।परियोजना का प्रमुख उद्देश्य देशी गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ उनसे प्राप्त पंचगव्य उत्पादों के वैज्ञानिक विकास को प्रोत्साहित करना रहा है। इसके अंतर्गत गौवंश से प्राप्त दूध, गोबर, गोमूत्र आदि प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से जैविक एवं पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के निर्माण तथा उनके उपयोग पर अनुसंधान कार्य किया गया।इस परियोजना के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए गए। परियोजना के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक उपकरण, आधारभूत संरचना एवं शोध सामग्री विश्वविद्यालय स्तर पर उपलब्ध कराई गई।परियोजना के अंतर्गत व्यय, क्रियान्वयन एवं प्रगति की नियमित निगरानी की गई तथा निर्धारित समय अंतराल पर संबंधित विभागों को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। सभी वित्तीय लेन-देन एवं कार्यों का ऑडिट नियमानुसार संपन्न किया गया, जिसमें किसी भी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता नहीं पाई गई।परियोजना से संबंधित समस्त अभिलेख एवं दस्तावेज विश्वविद्यालय एवं संबंधित विभागों में सुरक्षित रखे गए हैं, जो पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करते हैं।