मथुरा: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान ने संत समाज और धार्मिक संगठनों में खासी नाराजगी पैदा कर दी है। ओवैसी ने कहा था कि भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बन सकती है। इस पर संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे समाज में भ्रम और तनाव फैलाने वाला बताया है।श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा, "देश के कई हिस्सों में हिजाब को लेकर विवाद होते रहे हैं। ऐसे में हिजाब पहनकर प्रधानमंत्री बनने की बात करना व्यावहारिक नहीं है। यदि यह मुद्दा सार्वजनिक जीवन में विवाद पैदा करता है, तो देश की सर्वोच्च जिम्मेदारी निभाने में यह कैसे संभव होगा?"संतों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जनसंख्या बढ़ाकर भविष्य में राजनीतिक सत्ता हासिल करने का सपना देख रहे हैं। डॉ. आदित्यतानंद गिरि महाराज, रामदास जी महाराज और मधुसूदन दास जी महाराज ने कहा कि ऐसे बयानों से देश की संस्कृति और परंपराओं को बदलने की कोशिश होती है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है।साध्वी इंदुलेखा ने कहा, "देश की एकता और अखंडता सबसे महत्वपूर्ण है। कुछ वर्ग जनसंख्या के आधार पर दबाव बनाने की सोच रखते हैं, जो देशहित में नहीं है। भारत विविधताओं का देश है, और ऐसे भड़काऊ बयान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं।"संत समाज ने सरकार से अपील की है कि ऐसे विवादास्पद बयानों पर ध्यान दिया जाए और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ। उनका कहना है कि देश को आगे बढ़ाने के लिए एकता, समरसता और आपसी सम्मान जरूरी हैं, न कि विवाद और उकसावे।