मथुरा।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के हालिया फैसले को लेकर प्रसिद्ध संत और कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई ने इस फैसले के माध्यम से करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया है और यह कदम केवल खेल तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और मानवीय संदेश भी देता है।देवकीनंदन महाराज ने कहा कि कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) टीम के पास पूरा समय और अवसर था कि वह बांग्लादेशी खिलाड़ी को लेकर स्वयं निर्णय लेती। यदि टीम चाहती तो बिना किसी दबाव के खिलाड़ी को छोड़ने का फैसला कर सकती थी। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में टीम प्रबंधन को पहले ही जिम्मेदारी और समझदारी दिखानी चाहिए थी।उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर दुनिया का ध्यान जाना बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि वहां हिंदू समाज लगातार हिंसा और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो रही है। ऐसे में खेल जैसे बड़े मंच से दिया गया संदेश अधिक प्रभावी और व्यापक होता है।देवकीनंदन महाराज ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को उठाने का उद्देश्य किसी व्यक्ति या देश के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की पीड़ा और वेदना को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि जब धर्म और आस्था से जुड़ी भावनाएं आहत होती हैं, तो समाज के हर वर्ग को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि बीसीसीआई के इस फैसले से यह संदेश गया है कि भारत में भावनाओं, मूल्यों और संवेदनशीलता को महत्व दिया जाता है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में खेल संगठन और टीम प्रबंधन ऐसे मामलों में और अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील रवैया अपनाएंगे।अंत में देवकीनंदन महाराज ने कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन जब बात मानवता और आस्था पर चोट की हो, तब चुप रहना भी गलत है। उन्होंने कहा कि यह फैसला करोड़ों लोगों की भावनाओं की आवाज बनकर सामने आया है।