वृंदावन स्थित वात्सल्य ग्राम में तीन दिवसीय ‘वात्सल्य दिवस’ पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और भावनात्मक वातावरण के बीच मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में देशभर से आए श्रद्धालुओं, शिष्यों एवं अतिथियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन वात्सल्य ग्राम एवं संविद गुरुकुलम गर्ल्स सैनिक स्कूल परिसर में किया गया।कार्यक्रम में संविद गुरुकुलम सैनिक स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर वात्सल्य ग्राम की संस्थापिका पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा ने अपने उद्बोधन में संविद गुरुकुलम सैनिक स्कूल के माध्यम से पाकिस्तान से आए पीड़ित हिंदू बच्चों को शिक्षा देकर भारत में सम्मानपूर्वक बसाने के कार्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ, मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं अन्य पवित्र स्थलों की पुनः प्राप्ति उनके जीवन का मिशन है।पूज्या दीदी माँ ने पाकिस्तान पीड़ित हिंदू समाज के पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। इस अवसर पर जयपुर के ख्यात चिकित्सक डाॅ. ओमेन्द्र रत्नू द्वारा माँ के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित “मेरे मनोभाव” नामक भावपूर्ण वीडियो प्रस्तुति दी गई, जिसके माध्यम से उन्होंने दीदी माँ के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं।संविद गुरुकुलम गर्ल्स सैनिक स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए उनके शिष्यगणों एवं परमशक्ति पीठ से जुड़े सहयोगियों ने दीदी माँ के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। वक्ताओं ने वात्सल्य ग्राम द्वारा अनाथ, उपेक्षित और बेसहारा बच्चों की सेवा को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।ऑस्ट्रेलिया निवासी साहित्यकार  सोमा नायर ने अपनी कविता के माध्यम से दीदी माँ का यशोगान करते हुए भारत की नारी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं वैशिष्ट्यम एवं बीटीटीए की छात्राओं ने महाभारत पर आधारित संक्षिप्त नृत्य नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें द्रौपदी की विवशता, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उनकी लाज रक्षा तथा दुःशासन वध के माध्यम से स्त्री सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया गया।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए और दीदी माँ के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रसेवा के कार्यों की सराहना की।