सागर। चादामऊ में हुई आगजनी की घटना अब मानव अधिकार आयोग के संज्ञान में आ गई है। आयोग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और पूरे मामले का मुआयना किया। मानव अधिकार आयोग ने कहा कि इस मामले में पुलिस द्वारा घटना को दबाने और लीपापोती करने की कोशिश की गई। जांच के दौरान पता चला कि नरयावली थाना और जरूवाखेड़ा पुलिस चौकी ने अलग-अलग जांच की थी, लेकिन घटनास्थल पर स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूटी को पेट्रोल और बैटरी से ब्लास्ट बताया गया था, जबकि पुरानी स्कूटी से इतना बड़ा ब्लास्ट होना संभव नहीं था। जिस दीवार के पास स्कूटी रखी गई थी वह सफेद रंग की थी, लेकिन उस पर जलने के कोई निशान नहीं मिले, जिससे स्पष्ट होता है कि आग नीचे से नहीं बल्कि ऊपर से योजनाबद्ध तरीके से लगाई गई थी और ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल भी किया गया।जब मानव अधिकार आयोग की टीम ने थाना प्रभारी से फहीम खान की गिरफ्तारी के बारे में पूछा तो उन्होंने इनकार किया। इसके बाद चौकी प्रभारी से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि फहीम खान कस्टडी में है। लेकिन जांच के दौरान यह पाया गया कि न तो फहीम खान चौकी में था और न ही FIR दर्ज थी। राहतगढ़ अनुविभागीय कार्यालय से भी पता किया गया, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला। मानव अधिकार आयोग ने स्पष्ट किया कि यह आग योजनाबद्ध रूप से लगाई गई थी और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।गौरतलब है कि 4 दिसंबर की रात नरयावली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चादामऊ में आग लगने की घटना में दो मासूम बेटों की इलाज के दौरान मौत हो गई और एक बेटी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। युवती ने बयान दिया कि गांव का रहने वाला फहीम खान ने घर में आग लगाई थी। मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग के जिला मीडिया प्रभारी आशीष तिवारी ने बताया कि जिला अध्यक्ष बृजेश श्रीवास्तव, प्रदेश प्रभारी महिला विंग सुनील दुबे, जिला अध्यक्ष कु. एडवोकेट अर्चना तिवारी और जिला महासचिव इंदु वैद्य के नेतृत्व में टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।