अमरपाटन स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अतिथि विद्वानों के भुगतान को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस. के. वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने आयुक्त द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमविरुद्ध तरीके से भुगतान किया। बताया जा रहा है कि मार्च, अप्रैल और मई माह के दौरान कई अतिथि विद्वान महाविद्यालय में वास्तविक रूप से उपस्थित नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें भुगतान किया गया।जानकारी के मुताबिक कुछ अतिथि विद्वानों ने सार्थक पोर्टल पर अन्य स्थानों से चेक-इन या चेक-आउट दर्शाया, जबकि वे महाविद्यालय में उपस्थित नहीं थे। इसके बावजूद जनभागीदारी मद से उन्हें भुगतान कर दिया गया, जबकि आयुक्त के आदेशों में ऐसे मामलों में भुगतान न करने के स्पष्ट निर्देश हैं।मामले में यह भी सामने आया है कि श्री राकेश कोल ने तीन माह में कई दिनों तक महाविद्यालय से बाहर रहते हुए भुगतान प्राप्त किया। इसी तरह श्री सतीश विश्वकर्मा द्वारा कई तिथियों में सार्थक पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज न होने के बावजूद राशि जारी की गई, जबकि श्री गंगा साकेत के मामले में भी अलग-अलग स्थानों से चेक-आउट दिखाने के बावजूद वास्तविक उपस्थिति संदिग्ध बताई जा रही है।इस पूरे मामले ने उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, संभाग रीवा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आयुक्त के आदेशों की अवहेलना के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि नियमविरुद्ध भुगतान पर जवाबदेही तय होगी या मामला दबा दिया जाएगा।सूत्रों का कहना है कि केवल प्रभारी प्राचार्य ही नहीं, बल्कि उनके करीबी कर्मचारियों और संबंधित अतिथि विद्वानों की गतिविधियों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सभी उपस्थिति रिकॉर्ड, सार्थक पोर्टल लॉग और भुगतान विवरणों की गहन समीक्षा के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।अमरपाटन महाविद्यालय में सामने आया यह मामला नियमों की अनदेखी और जनभागीदारी मद के संभावित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। अब आवश्यकता है कि विभागीय स्तर पर उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।