मथुरा। मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की पूर्व विधायक रामबाई परिहार के एक बयान के बाद सियासी और धार्मिक माहौल गरमा गया है। दमोह जिले के पथरिया क्षेत्र में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके भाषण को लेकर संत समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है।आरोप है कि मंच से बोलते हुए उन्होंने साधु-संतों, पंडितों, धर्मगुरुओं, सवर्ण समाज, भाजपा और कुछ प्रमुख धार्मिक व्यक्तियों के बारे में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। कार्यक्रम में रामबाई परिहार ने बिना नाम लिए बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, जगद्गुरु रामभद्राचार्य और अन्य धर्मगुरुओं पर टिप्पणी की। उन्होंने भविष्यवाणी करने वाले संतों पर तंज करते हुए कहा कि ये लोग भविष्य तो बताते हैं, लेकिन किसी बड़ी घटना की सही जानकारी नहीं दे पाते।उनके शब्दों को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है, क्योंकि भाषण में भाषा की मर्यादा का पालन नहीं किया गया। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बृज क्षेत्र में भी साधु-संतों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।बृज भूमि के संतों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां सनातन धर्म, साधु समाज और धार्मिक भावनाओं का अपमान हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि संत समाज का अपमान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।इसके अलावा रामदास जी महाराज, मधुसूदन महाराज और अंकित शास्त्री ने भी पूर्व विधायक के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि राजनीतिक मंचों से इस तरह की भाषा समाज में वैमनस्य फैलाती है।संतों का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन भाषा की मर्यादा और धार्मिक आस्था का सम्मान बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, वहीं संत समाज आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है।