रीवा। महामंडलेश्वर अखिलेश्वर दास महाराज द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर दिए गए बयान तथा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह के दौरान व्यक्त किए गए कथित उन्मादपूर्ण विचारों पर कांग्रेस के प्रदेश महासचिव गुरमीत सिंह मंगू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इन बयानों को निंदनीय बताते हुए कहा कि संत का कार्य समाज में ज्ञान, संस्कार और सद्भाव का प्रसार करना होता है, न कि धार्मिक उन्माद फैलाना।गुरमीत सिंह मंगू ने कहा कि जो व्यक्ति संत पद पर रहते हुए समाज में नफरत और उन्माद फैलाने का कार्य करता है, वह महामंडलेश्वर कहलाने योग्य नहीं है, बल्कि गोडसे की विचारधारा का समर्थक मात्र है। उन्होंने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह जैसे गरिमामय और शैक्षणिक आयोजन में ऐसे विचारधारा वाले व्यक्ति को आमंत्रित किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई।कांग्रेस नेता ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि कुलपति, कुलसचिव एवं कार्यक्रम के आयोजकों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय के कुलपति इस मामले में विंध्य क्षेत्र की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की पावन भूमि पर महर्षि वाल्मीकि जैसे संतों ने अपने जीवन में परिवर्तन कर भगवान राम के आदर्शों को अपनाया और रामायण की रचना कर समाज को नई दिशा दी। इसके विपरीत महामंडलेश्वर अखिलेश्वर दास महाराज ने भगवान राम के आदर्शों को भुलाकर गोडसे जैसे आचरण को अपनाते हुए संत परंपरा को कलंकित किया है।गुरमीत सिंह मंगू ने यह भी कहा कि महामंडलेश्वर द्वारा ऐसे महापुरुष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, जिन्हें न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व ‘बापू’ के नाम से श्रद्धा और सम्मान देता है। संत पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा और विचार समाज के लिए घातक हैं।अंत में उन्होंने कहा कि समाज में अमन-चैन, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने के लिए ऐसे उन्मादी विचारधारा वाले तथाकथित संतों का हर स्तर पर विरोध और तिरस्कार किया जाना आवश्यक है, तभी देश में शांति और सामाजिक एकता कायम रह सकेगी।