रीवा केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के आह्वान पर विभिन्न श्रमिक संगठनों ने श्रम पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द करने, ठेकाकरण, आउटसोर्सिंग और फिक्स्ड टर्म रोजगार पर रोक लगाने की मांग की गई। इसमें संगठित और असंगठित, ठेका, योजनाकर्मी और कृषि श्रमिकों सहित सभी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की भी मांग शामिल रही। इसके साथ ही राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह, 10 हजार रुपये मासिक पेंशन, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक, प्रीपेड स्मार्ट मीटर बंद करने, खेती के लिए मुफ्त बिजली और घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की मांग प्रमुख रही।ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि किसानों और मजदूरों के लगातार देशव्यापी आंदोलनों के बावजूद सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। श्रमिक नेताओं ने कहा कि श्रम संहिताएं न्यूनतम वेतन, सुरक्षित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और यूनियन बनाने के अधिकार को कमजोर करेंगी, जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी।प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान सीटू, इंटक, एम.आर. यूनियन सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।