मथुरा। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), मथुरा की 60वीं छमाही बैठक मंगलवार 09 दिसंबर 2025 को मथुरा रिफाइनरी के एम्प्लॉयीज़ क्लब में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष एवं मथुरा रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक व रिफाइनरी प्रमुख श्री मुकुल अग्रवाल ने की, जबकि गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग (क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय उत्तर-2, गाजियाबाद) के उप निदेशक डॉ. छबिल कुमार मेहेर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।बैठक की शुरुआत वंदे मातरम् एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। स्वागत संबोधन देते हुए मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्री अनिल कुमार ने कहा कि राजभाषा के प्रति प्रेम न केवल भाषा का सम्मान है, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना को भी सुदृढ़ करता है। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।अध्यक्ष श्री मुकुल अग्रवाल ने कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों का दायित्व है कि वे हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दें और राजभाषा नियमों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने नराकास मथुरा को सदस्य कार्यालयों के लिए एक मजबूत साझा मंच बताया, जो हिंदी कार्यप्रणाली को गति देने और चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य अतिथि डॉ. छबिल कुमार मेहेर ने सदस्य कार्यालयों की प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर हिंदी प्रगति की समीक्षा की और संतोष व्यक्त किया। उन्होंने वार्षिक कार्यक्रम, धारा 3(3) के अक्षरशः पालन और हिंदी में कार्य करने की सतत आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

बैठक में राजभाषा हिंदी के उत्कृष्ट क्रियान्वयन हेतु वर्ष 2024–25 के लिए शील्ड भी प्रदान की गई।

  • प्रथम स्थान – केनरा बैंक (क्षेत्रीय कार्यालय, मथुरा)

  • द्वितीय स्थान – भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा, मथुरा)

  • तृतीय स्थान – हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मथुरा

इसके साथ ही भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को प्रोत्साहन प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।नराकास ने इस बार एक नई पहल भी की, जिसके तहत उन कार्यालय प्रमुखों को विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए जो पिछली तीन बैठकों में लगातार उपस्थित रहे और राजभाषा नीति तथा धारा 3(3) का पूर्ण अनुपालन कर रहे हैं।बैठक में वरिष्ठ प्रबंधक (कॉर्पोरेट संचार) सुश्री रेनू पाठक ने समिति की छमाही रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मथुरा रिफाइनरी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंक, विद्यालयों और बीमा कंपनियों के राजभाषा अधिकारी एवं कार्यालय प्रमुख शामिल हुए।