सिवनी से सुप्रीम कोर्ट तक: आवारा पशु आदेश पर सैकड़ों पुनर्विचार पत्र भेजे गए
सिवनी, मनोरमा जी बाई वेलफेयर फाउंडेशन और हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन ने 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के आवारा पशुओं से संबंधित आदेश के विरोध में सैकड़ों पुनर्विचार याचिकाएँ भेजीं।दोनों संगठनों ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया। उनका कहना है कि आदेश बिना दोनों पक्षों को सुने पारित हुआ, जो प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है।संगठनों ने चेताया कि ऐसी प्रक्रिया न्यायपालिका पर जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि आदेश ABC नियमावली 2023 और संविधान पीठ के निर्णयों के विपरीत है।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि वे मनुष्यों और पशुओं दोनों की सुरक्षा के पक्षधर हैं। लेकिन सीमित संसाधनों और ढांचे के कारण आदेश का पालन पशुओं की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है। विशेषकर शहरों से दूर बिना भोजन, पानी और दवाओं के जानवरों को छोड़ना अनुचित बताया गया।टीम ने बताया कि “Animal Writes” नाम से यह आंदोलन देशभर में तेज़ी से चल रहा है। इसी पहल को सिवनी से विशेष पहचान देते हुए MBWF टीम ने इसका नाम “Seoni Writes for Animal Rights” रखा है।

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